साल आया है नया

यार तू दाढ़ी बढ़ा ले, साल आया है नया
नाई के पैसे बचा ले, साल आया है नया

तेल, कंघा, पाउडर के खर्चे कम हो जाएंगे
आज ही सिर को घुटा ले, साल आया है नया

चाहता है तू अगर हसीनों से नज़दीकियां
चाट का ठेला लगा ले, साल आया है नया

जो पुरानी चप्पलें हैं, मंदिरों के पास रख
कुछ नये जूते चुरा ले, साल आया है नया

मैं अठन्नी दे रहा था तब भिखारी ने कहा
तू यहीं चादर बिछा ले, साल आया है नया

दो महीने बर्फ गिरने के बहाने चल गये
आज तो हुल्लड़ नहा ले, साल आया है नया

दौड़ में यश और धन की जब पसीना आए तो
सब्र साबुन से नहाले, साल आया है नया

मौत से तेरी मिलेगा फॅमिली को फायदा
आज ही बीमा करा ले, साल आया है नया

भूल जा शिखवे शिकायत ज़ख्म पिछले साल के
साथ मेरे मुस्कुरा ले, साल आया है नया

- Hullad Muradabadi

Comment below to join the conversation :)


Recommended Poems


भेड़ियों के ढंग

Author - udaybhanu Hans
Theme - Cynical, thoughtful

साँप!

Author - Ajneya
Theme - Frustration, cynical