एक नया नज़रिया

एक रोज़ रमाकांत बाल कटवाने हेतु नाइ की दूकान पर पहुंचा.

रमाकांत को मास्टर नाइ के पास आना बढ़ा पसंद था. बाल कटवाने के साथ साथ बढ़ी विचित्र बातें भी होती थी यहाँ. बैठते ही रमाकांत ने मास्टर से पुछा, "और सुनाओ मास्टर, इस बार क्या नया चल रहा है?" ये सुनते ही मास्टर ने कहा "बस क्या सुनाये रमाकांत जी, भगवान पर से भरोसा उठ गया हमारा तो".

रमाकांत आश्चर्यचकित रह गया "ऐसा क्यूँ बोल रहे हो मास्टर, क्या गज़ब हो गया?"

"आप बस बाहर सड़क पर जाइये , और आपको दिख जायेगा की भगवान नाम की कोई चीज़ नहीं है इस दुनिया में. आप ही बताइये, अगर भगवान है, तो इतनी बीमारियां क्यूँ हैं? इतने बच्चे अनाथ क्यूँ हैं? अगर भगवान होते, तो इतना दर्द क्यूँ होता इस दुनिया में? जो भगवान ये सब होने दे रहा है, उसको मैं कैसे पूजूँ?"

रमाकांत ने कुछ देर विचार किया, फिर सोचा कि अभी कौन इससे सिर खपाये , शान्ति से बैठ जाते हैं.

कुछ ही देर में मास्टर ने अपना काम ख़त्म किया और रमाकांत दुकान से निकल गया. तभी उसने सड़क पर एक आदमी को देखा जिसके बाल बहुत बढे और गंदे थे, दाढ़ी भी लग रहा था कि बहुत महीनो से नहीं बनाई. यह देखते ही, रमाकांत वापस मास्टर की दुकान में गया और बोला "एक बात बताऊ? इस दुनिया में नाइ नहीं हैं"

"कैसी बात कर रहे हो?" मास्टर ने कहा "मैं यहीं हूँ, मैं एक नाइ हूँ और मैंने अभी तो तुम्हारे बाल काटे!!"

"नहीं !" रमाकांत ने जवाब दिया "इस दुनिया में नाइ नहीं हैं, क्यूंकि अगर नाइ होते, तो इस दुनिया में लोगों की दाढ़ी बनी हुई होती, और बढ़े और गंदे बाल नहीं होते, जैसे उस आदमी के हैं बाहर सड़क पर." "अरे पर नाई तो होते हैं साहब, दिक्कत ये है कि लोग हमारे पास आते ही नहीं "

"बिलकुल सही" रमाकांत बोला "यही तो बात है, भगवान हैं, पर लोग उनके पास जाते ही नहीं, उनको ढूंढते ही नहीं इसलिए इस दुनिया में इतना दर्द है "

- Noor

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