कौन है बोरिंग?

ये पिछले महीने की बात है.. मेरी बहन अनीता मेरे साथ रहने आई थी कुछ दिनों के लिए.

उन दिनों मौसम बहुत सुहाना रहता था, ठंडी हवा सुबह चलना शुरू होती थी और रात तक रुकने का नाम न लेती. मैं रोज़ सुबह जल्दी उठ कर सैर पर निकल जाती.

एक रोज़ मेरी बहन भी सुबह उठी हुई थी और अपने फ़ोन पर व्यक्त थी.

मैंने अनीता से सैर पर चलने को कहा, उसका जवाब मुझे बहुत अटपटा लगा - "लेकिन सैर पर जाना बहुत बोरिंग होता है "

अनीता से मैंने बोला कि आज तुम मेरे साथ सैर पर चलो, देखना सुबह के नज़ारे कितने खूबसूरत होते हैं, फिर देखते हैं तुम बोर कैसे होती हो.

हमने सैर शुरू करी एक उद्यान में . ओस की बूंदे हरी घास पर चमक रही थीं. मैं गिलहरियों को खिलाने हेतु चने लाइ थी. रास्ते भर गिलहरियां हमारे आस पास घूमती रहीं और मैं उनको चने खिलाती रही. थोड़ी ही दूर कुछ बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे . उन बच्चों ने अपने पसंदीदा खिलाडियों की जर्सी पेहेन राखी थी. मैं ये देख रुक न सकी और बोली "अनीता, वहां देखो, मेस्सी, रोनाल्डो, पोग्बा , सभी दिखेंगे "

अनीता फ़ोन से ऊपर देखे बिना ही बोली "हाँ अच्छा है, अब वापिस चलें? मैं बहुत बोर हो रही हूँ."

मैं मुस्कुराते हुए सोच में पढ़ गयी. यहाँ इतना अच्छा मौसम था, देखने को इतने नज़ारे, लेकिन फिर भी अनीता बोर हो रही थी. बोरिंग चीज़े नहीं होती, बोरिंग वातावरण नहीं होता, बोरिंग माहौल नहीं होता, बोरिंग जगह नहीं होती... बोरिंग तो सिर्फ हम खुद होते हैं.

- Noor

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