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एक नया नज़रिया

एक रोज़ रमाकांत बाल कटवाने हेतु नाइ की दूकान पर पहुंचा. रमाकांत को मास्टर नाइ के पास आना बढ़ा पसंद था. बाल कटवाने के साथ साथ बढ़ी विचित्र बातें भी होती थी यहाँ. बैठते ही रमाकांत ने मास्टर से पुछा, "और सुनाओ मास्टर, इस बार क्या नया चल रहा है?" ये सुनते ही मास्टर ने कहा "बस क्या सुनाये रमाकांत जी, भगवान पर से भरोसा उठ गया हमारा तो".

कौन है बोरिंग?

ये पिछले महीने की बात है.. मेरी बहन अनीता मेरे साथ रहने आई थी कुछ दिनों के लिए. उन दिनों मौसम बहुत सुहाना रहता था, ठंडी हवा सुबह चलना शुरू होती थी और रात तक रुकने का नाम न लेती. मैं रोज़ सुबह जल्दी उठ कर सैर पर निकल जाती. एक रोज़ मेरी बहन भी सुबह उठी हुई थी और अपने फ़ोन पर व्यक्त थी.